कुंजापुरी मंदिर का इतिहास – History of Kunjapuri Mandir

माँ कुन्जापुरी देवी का यह मंदिर उत्तराखंड राज्य के टिहरी जिले में स्थित है | हिन्दुओं का यह प्राचीन मंदिर देवी के 51 शक्ति पीठों में से एक है ऋषिकेश से 25 km दूर और समुद्र तल से 1,676 मीटर की उंचाई पर स्थित यह मदिर कुंजापुरी देवी , सुरकंडा देवी, और चंद्रभद्दी देवी इन तीन सिद्ध पिठों के त्रिकोण को भी पूरा करता है।

शिवालिक पहाड़ियों की छोटी पर स्थित इस मंदिर से गंगोत्री, बंदरपूंछ, स्वर्गारोहिणी, चैखंबा, सूर्योदय और सूर्यास्त का बहुत ही सुन्दर दृश्य देखने को मिलता है।

पुराणों के अनुसार यह मंदिर जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया था | और 01-अक्टूबर-1979 से 25-फरवरी-1980 तक मन्दिर का नवीनीकरण किया गया था। और 1982 में पूज्य श्री सच्चाबाबा ने अनुष्ठान कर इस स्थान की महत्ता को उजागर किया था।

कुंजापुरी मंदिर की महिमा एवं मान्यताये – Glory and recognition of Kunjapuri Temple

मंदिर के मुख्य पुजारी होशियार सिंह भंडारी ने बताया कि इस स्थान पर माता सती देवी का हाथ (कुंज) गिरा था इसीलिए यह मंदिर को कुंजापुरी के नाम से जाना जाता है । चौकाने वाली बात तो यह है की इस मंदिर के गर्भगृह में देवी की कोई मूर्ति स्थापित नहीं है। बल्कि अन्दर एक शिलारूप पिण्डी स्थापित है। उस पिंडी के निचे एक अखंड ज्योति जलती रहती है।

मंदिर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ हाथियों के मस्तक की दो-दो मूर्तियां बनी हुई हैं। इस मंदिर के गर्भ गृह में ही एक शिवलिंग तथा गणेश जी की मूर्ति स्थापित है। वैसे तो गढ़वाल के सभी मंदिरो में ब्राह्मण पुजारी होते हैं | लेकिन इस देवी के मंदिर में राजपूत जाती के ब्राह्मण है |

कुंजापुरी मन्दिर परिसर में सिरोही का एक पेड़ है जिस पर श्रद्धालु अपने सच्चे मन और श्रद्धा के साथ धागा या चुनरी बांधकर अपनी मनोकामना मांगते है और माँ कुंजापुरी उनकी सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं। श्रद्धालुयो की मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु यहां पर दोबारा आते है और मां को नारियल चुनरी का प्रशाद चढ़ाकर और धागा खोलकर उनका आशीर्वाद लेते हैं।

मन्दिर परिसर में मुख्य मन्दिर से अलग एक और मन्दिर है जिसमें भगवान शिव, महाकाली, भैरवबाबा और नरसिंह भगवान की मूर्तियां स्थापित हैं। हिन्दुओं का विशेष पर्व जैसे नवरात्रो में यहां पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है |

कुंजापुरी देवी मंदिर की पौराणिक कथा – Legend of Kunjapuri Devi Temple

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता सती राजा दक्ष प्रजापति की पुत्री थी जिनका का विवाह भगवान शिव के साथ हुआ था | एक बार दक्ष प्रजापति ने अपने निवास स्थान कनखल हरिद्वार में एक भव्य यज्ञ का आयोजन कराया और इस भव्य यज्ञ में दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव को छोड़कर बाकि सभी देवी देवताओं को आमंत्रित किया | जब माता सती को पता चला की मेरे पिता ने इस भव्य यज्ञ मेरे पति को आमंत्रित नहीं किया | अपने पिता द्वारा पति का यह अपमान देख माता सती ने उसी यज्ञ में कूदकर अपने प्राणो की आहुति देदी थी |

यह सुचना सुनकर भगवान शिव बहुत क्रोधित हो गए अपने अर्ध-देवता वीरभद्र और शिव गणों को कनखल युद्ध करने के लिए भेजा। वीरभद्र ने जाकर उस भव्य यज्ञ को नस्ट कर राजा दक्ष का सिर काट दिया। सभी सभी देवताओं के अनुरोध करने पर पर भगवान शिव ने राजा दक्ष को दोबारा जीवन दान देकर उस पर बकरे का सिर लगा दिया। यह देख राजा दक्ष को अपनी गलतियों का पश्च्याताप हुआ और भगवान शिव से हाथ जोड़कर क्षमा मांगी। तभी भगवान शिव ने सभी देवी देवताओं के सामने यह घोषणा कि हर साल सावन माह, में कनखल में निवास करूँगा ।

भगवान शिव अत्यधिक क्रोधित होते हुए सती के मृत शरीर उठाकर पुरे ब्रह्माण के चक्कर लगाने लगे | तब पश्चात भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित करा था | जिस कारन से सती के जले हुए शरीर के हिस्से पृत्वी के अलग-अलग स्थानों पर जा गिरे । जहा-जहा पर सती के शरीर के भाग गिरे थे वे सभी स्थान “शक्तिपीठ” बन गए । जहा पर कुंजापुरी देवी का मंदिर है इस स्थान पर माता सती का हाथ (कुंजा) गिरा था | इसीलिए इस मंदिर की गणना 51 शक्तिपीठो में की जाती है | भक्त यहां पर आकर माँ कुंजापुरी देवी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते है ।

कुंजापुरी मंदिर में कैसे पहुंचे – How to reach Kunjapuri Temple

कुंजापुरी मंदिर तक पहुंचने के लिये आपको ऋषिकेश के नाराज चौक से 23 km की दूरी पर स्थित हिन्डोलाखाल नामक एक छोटे से पहाड़ी बाजार तक का सफर तय करना पड़ेगा | जो की टिहरी राजमार्ग पर स्थित है | मन्दिर हिन्डोलाखाल से लगभग 4 km दूर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है जहा पहुंचने के लिये सड़क और पैदलमार्ग दोनों हैं।और मंदिर के निचे वाले द्वार से 308 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर के मुख्य द्वार तक पंहुचा जाता है |

मंदिर के कपाट खुलने और आरती का समय – Temple opening and aarti time

कुंजापुरी मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह 6 बजे से शाम के 6.30 बजे तक खोले जाते है।
सुबह 6 बजे से 6.30 तक
शाम 6 बजे से 6.30 तक

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