गंगोत्री धाम का इतिहास – History of Gangotri Dham in hindi

दोस्तों आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको उत्तराखंड राज्य के चार धामों में से एक गंगोत्री धाम की सम्पूर्ण जानकारी विस्तार से बताने वाले है तो आपसे निवेदन है की आप इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़े। माँ गंगा देवी को समर्पित गंगोत्री धाम का यह मंदिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित है हिन्दुओं का यह पवित्र तीर्थ स्थल उत्तरकाशी से लगभग 100 km दूर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। गंगोत्री मंदिर का नाम भी उत्तराखंड की चार धाम यात्रा में सम्मिलित होता है।

गंगा नदी का यह उद्रम स्थान 3,100 मीटर (10,200 फीट) की ऊंचाई पर ग्रेटर हिमालय रेंज पर स्थित है। जो की भारत के सबसे प्रमुख मंदिरो में से एक है।

गंगोत्री धाम के इस मन्दिर में सूर्यकुण्ड, विष्णुकुण्ड और ब्रह्मकुण्ड ये तीन पवित्र स्थल हैं |

गंगोत्री धाम में मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी के शुरूआत में गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा किया गया था और वर्तमान में मंदिर का पुनः निर्माण जयपुर के राजघराने द्वारा किया गया था।


गंगोत्री धाम की पौराणिक कथाये – Mythological stories of Gangotri Dham

पौराणिक कथाओ में ऐसा वर्णन किया हुआ है की श्री रामचंद्र के पूर्वज राजा भगीरथ ने अपने पूवर्जो के पापो से मुक्ति पाने के लिए गंगोत्री धाम के एक पवित्र शिलाखंड पत्थर पर बैठकर शंकर भगवान और माँ गंगा की कठोर तपस्या की थी। राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन होकर माँ गंगा दायनी ने जीवन की इस धारा को पृथ्वी पर पहली बार स्पर्श किया था। और इसी स्थान पर भगवान शंकर ने माँ गंगा के इस प्रभाव को कम करने के लिए उन्हें अपनी घुंघराली जटाओ में लपेट लिया था। ताकि पृत्वी पर मनुस्य जीवन जीवित रहे।

मंदिर के समीप भागीरथी नदी में एक चट्टान शिवलिंग के रूप में जलमग्न है। सर्दियों के समय जब माँ गंगा का स्तर काफी काम हो जाता है तब उस उस समय इस पवित्र शिवलिंग के दर्शन होते है। पौराणिक कथा के आधार पर माँ गंगा को भागीरथी नदी भी कहते है।

दूसरी और ऐसी भी मान्यता है कि महाभारत के युद्ध में पांडवो ने विजय प्राप्त कर युद्ध में मारे गए अपने परिजनो की आत्मा की शांति के लिए इसी स्थान पर आकर एक महान देव यज्ञ का अनुष्ठान किया था। गंगोत्री धाम का 20 फुट उचा यह पवित्र मंदिर सफेद ग्रेनाइट के चमकदार पत्थरों से बना हुआ है।

मई से अक्टूबर के बीच में लाखो श्रद्धालु माँ गंगा के दर्शन करने के लिए या पर आते है। मंदिर अक्षय तृतीया के पावन शुभ अवसर पर खुलता है और दीपावली के समय मंदिर को 6 माह के लिए बंद कर दिया जाता है। क्योकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारन मंदिर पूरी तरह से बर्फ से धक् जाता है।

गंगोत्री धाम से जुडी महत्वपूर्ण किंवदंतियाँ – Important legends related to Gangotri Dham

पृथ्वी पर राक्षसों का वध करने के बाद राजा सागर ने एक अश्वमेध यग करने का फैसला किया। पहली महारानी सुमति के 60,000 पुत्रो एवं दूसरी रानी केसनी से हुए पुत्र असमंजा के द्वारा पृथ्वी के चारों ओर एक घोड़ा ले जाया जाना था | देवताओं के राजा इंद्र को भय था कि अगर यह ‘यज्ञ’ सफल हो गया तो उन्हें अपने सिंहासन से वंचित होना पद सकता हैं | इंद्र ने घोड़े को लेजाकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। जो तपस्या में मग्न थे | राजा सागर के पुत्रों ने आखिरकार घोड़े की खोज कर उसे ध्यानमग्न कपिल मुनि के पास बंधा पाया। और आश्रम पर धावा बोल दिया। कपिल मुनि की तपस्या भंग होने से उन्होंने सभी को पुत्रो को श्राप देदिया जिससे राजा सागर के 60,000 पुत्रो की मृत्यु हो गयी | ऐसा माना जाता है कि राजा सागर के पौत्र राजा भागीरथ ने देवी गंगा को धरती पर उत्पन करने के लिए और अपने पूर्वजों की अस्थिया बहाने और उनकी आत्मा को मुक्ति दिलाने के लिए उनका ध्यान किया ताकि।


गंगोत्री मंदिर के कपाट खुलने एवं बंद होने समय – Gangotri Temple opening and closing times

गंगोत्री धाम के कपाट प्रत्येक वर्ष मई माह में ‘अक्षय-तृतीय’ के शुभ अवसर पर खोले जाते है और दिवाली से अगले दिन भाईदोज पर एक भव्य समापन समरोह के बाद मंदिर के कपाट को 6 माह के लिए बंद कर दिया जाता है इस बिच माँ गंगा देवी के दर्शन करने के लिए लाखो श्रद्धालु यहां पर आते है।

सर्दियों में बर्फ गिरने के कारन मंदिर को 6 माह के लिए पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाता है इस दौरान माँ गंगा की मूर्ति को मुखबा के पास वाले गांव में लाकर उनकी पूजा अर्चना की जाती है। उत्तखण्ड की चार धाम यात्रा में सबसे पहले गंगोत्री धाम के कपाट बंद होते है|

कियोंकि सर्दियों में बर्फ से ढके पहाड़ उत्तराखंड की चार धाम यात्राओं को बंद होने का संकेत देते है।

गंगोत्री मंदिर के दर्शन करने का सबसे अच्छा समय – Best time to visit Gangotri Temple

गंगोत्री धाम की यात्रा करने के लिए अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर माह का सबसे अच्छा समय होता है | कियोंकि मानसून के समय यहां पर अधिकतर बारिश और भू-स्खलन का खतरा रहता है इसलिए इस दौरान यात्रा करना काफी कठिन हो सकता है |

गंगोत्री धाम कैसे पहुंचे – How to reach Gangotri Dham

हवाई मार्ग – जॉली ग्रांट हवाई अड्डा देहरादून

ट्रेन मार्ग – हरिद्वार और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है वहा  से आप गंगोत्री धाम के लिए सीधे शेयरिंग टैक्सी, परसनल टैक्सी, या बस ले सकते है

सड़क मार्ग – गंगोत्री धाम जाने के लिए आप हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून से आराम से जा सकते हैं जहा पर टैक्सी और बस की सारी सुविधाएं उपलब्ध है |

गंगोत्री धाम देहरादून से लगभग 300 km, ऋषिकेश से 250 km और उत्तरकाशी से 105 km दूर है। यह मार्ग हरिद्वार, ऋषिकेश, टिहरी, उत्तरकाशी, भटवारी, गंगनानी, गंगोत्री से अच्छी तरह जुड़ा है। बस या टैक्सी आपको सीधे मंदिर तक छोड़ देगी वहा पर आपको पैदल नहीं चलना पड़ेगा |

गंगोत्री के पास में ट्रेकिंग करने के स्थान

गौमुख – गोमुख यानि की माँ गंगा का असली स्रोत माना जाता है। यहां का शिवलिंग पर्वत और भागीरथ पहाड़ी समूह के शानदार दृश्य प्रस्तुत करते है | गंगोत्री से लगभग 18 km पैदल यात्रा के बाद यहाँ पहुंचा जा सकता है।

तपोवन – उत्तराखंड की पहाड़ियों में स्थित तपोवन शिवलिंग शिखर का आधार शिविर है। यहां पर आने वाले पर्यटकों के लिए तपोवन एक शांति और आदर्श स्थान है। जो की समुद्र तल से 14640 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

दोस्तों हम उम्मीद करते है कि आपको “गंगोत्री धाम” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा।

दोस्तों हम उम्मीद करते है कि आपको “गंगोत्री धाम मंदिर” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा।

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गंगोत्री धाम मंदिर की और अधिक जानकारी के लिए निचे दी गयी विडियो को देख सकते है।

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Kedarnath Dham Mandir
Badrinath Dham Mandir
Yamnotri Dham Mandir
Gomukh Yatra

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