नमस्कार मेरे प्यारे दोस्तों कैसे हो उम्मीद करता हूँ की आप सभी बहुत अच्छे होंगे। इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको ऋषिकेश में स्थित त्रिवेणी घाट के बारे में बताने जा रहे है। जो की काफी प्रशिद्ध और लोकप्रिय है।

त्रिवेणी घाट का इतिहास – History of triveni ghat in hindi

त्रिवेणी घाट उत्तराखंड राज्य के ऋषिकेश में हिमालय पर्वतो के तल में बसा एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। इस स्थान पर गंगा, यमुना और सरस्वती इन तीन प्रमुख नदियों का संगम होता है। जिसकी वजय से यह स्थल त्रिवेणी घाट के नाम से जाना जाता है। सुबह और शाम के समय में यहां गंगा आरती का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। जिसमे भक्तो की काफी भीड़ उमड़ती है। ऋषिकेश में घूमने आये यात्री इस त्रिवेणी घाट के पवित्र जल में स्नान आदि कर मंदिरों के दर्शन करते है। कहते है की हरिद्वार की हर की पौड़ी में स्नान करने जितना लाभ त्रिवेणी घाट में भी मिलता है। हिन्दू धर्म की पौराणिक कथाओं में त्रिवेणी घाट एक महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। रामायण और महाभारत के मुताबिक ऐसा कहा जाता है की भगवान श्री कृष्ण ने इस पवित्र स्थान का दौरा किया था।

इस तीर्थ घाट पर भक्तगण अपने पितरो की शांति के लिए पिंड श्राद्ध की पूजा पाठ भी कराते है। पास में ही गंगा माता मंदिर है। त्रिवेणी घाट के एक तरफ भगवान शिव की जटा से निकलती गंगा की प्रतिमा है वही दूसरी और पांडव अर्जुन को गीता ज्ञान लेते हुए श्री क्रिहना की विशाल मूर्ति है। शाम के समय आरती में यह हजारो भक्तो की भीड़ उमड़ जाती है।

अगर आप ऋषिकेश में घूमने के लिए आते है तो यहां त्रिवेणी घाट के अलावा बहुत सारे धार्मिक और पर्यटक स्थल है। जैसे राम झूला, लक्ष्मा झूला, नीलकंठ महादेव मंदिर, झिलमिल गुफा, और कुंजापुरी मंदिर इन सब के बारे में जानने के लिए आप निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे।

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