नीलकंठ महादेव मंदिर – Neelkanth Mahadev Temple in hindi

दोस्तों आज के इस आर्टिकल मे हम आपको नीलकंठ महादेव मंदिर के बारे बताने जा रहे है। हिन्दू धर्म के प्रमुख देवाओं में से एक देवो के देव महादेव अपने गले में नाग, हाथों में डमरू, त्रिशूल और बालो की जटा में चन्द्रमा,माँ गंगा को धारण किये भगवान शिव को अनेक नामो से जाना जाता है। जैसे शिव, शंकर, भोलेनाथ, महेश, रूद्र, और नीलकंठ महादेव इन सभी प्रसिद्ध नामो के पौराणिक कथाओं में कई महत्व है। आज हम आपको समुद्र मंथन से जुडी नीलकंठ महादेव मंदिर की रहस्य भरी कहानी के बारे में बताने जा रहे है। 


नीलकंठ महादेव मंदिर का इतिहास – History of Neelkanth Mahadev Temple in hindi

नीलकंठ महादेव का मंदिर उत्तराखंड राज्य के ऋषिकेश से लगभग 30 km दूर और 5500 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। स्वर्ग आश्रम के पर्वत की चोटी पर बसा यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। हिन्दुओं के इस प्राचीन मंदिर को ऋषिकेश के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक माना जाता है। समुद्र मंथन से निकला हलाहल कालकूट नाम का विष जिसको भगवान शिव ने इसी स्थान पर अपनी कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव से उनका कंठ यानि गाला नीला पड गया था इसीलिए महादेव के इस मंदिर को नीलकंठ महादेव के नाम से जाना जाता है।

नीलकंठ के रास्ते आपको माँ गंगा का अधभुद नजारा देखने को मिलता है जो गोमुख से निकलकर पर्वतो के बिच से बहती हुई ऋषिकेश के समुद्र तल यानि धरती को स्पर्श करती है। इस बिच राम झूला और लक्ष्मण झूला का भी सुंदर दृश्य देखने को मिलता है।

नीलकंठ महादेव मंदिर की नक़्क़ाशी समुद्र मंथन के दृश्य को दर्शाती है। जसिमे देवताओं और असुरो के बिच समुद्र मंथन और भगवान शिव को विष पीते हुए एक विशाल पेंटिंग में दर्शाया हुआ है। मंदिर के मुख्य गर्भ ग्रह के अंदर भगवान शिव एक शिवलिंग के रूप में विराजमान है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने कैलाश पर्वत पर जाने से पहले अपनी कंठ के रूप में इस शिवलिंग को स्वयं स्थापित किया था। जिसके चारो तरफ चाँदी की चौकी बनी हुई है।

शिवलिंग के सामने ही नंदी महाराज विराजमान है। इस मंदिर के प्रांगण में स्थित एक पंचपणी पेड़ कई हजार साल पुराणा है। कहते है की भगवान शिव ने इसी पेड़ के निचे कई हजार साल तप किया था। और इस मंदिर में एक अखंड धुंना है। जहा पर हमेशा धुंना जलता रहता है। भक्तो की मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां पर त्रिशूल चढ़ाते है और प्रसाद के रूप में इस धुनें की भस्म को घर लेकर जाते है। नीलकंठ महादेव मंदिर में कावड़ मेला और देख रेख श्री पंचायती अखाडा महानिर्वाणी के द्वारा की जाती है।

सावन के महीने में शिव भक्त यानि कावड़िये नीलकंठ महादेव अपनी कांवड़ में गंगाजल लेकर आते हैं। कई घंटो लम्भी लाइन में लगकर  महादेव का गंगाजल से अभिषेक करते हैं। हर साल शिवरात्रि के शुभ पावन अवसर पर यहाँ मेला लगता है। सावन के पुरे महीने यहाँ पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रहती है।


नीलकंठ महादेव मंदिर की पौराणिक कथा – Story of Neelkanth Mahadev Temple in hindi

जब देवताओं और असुरो के बिच समुद्र मंथन हो रहा था। तो उसमे से 14 रत्न निकले थे जिसमे से एक हलाहल नाम का विष भी निकला था। जिसे ना तो देवता ग्रहण करना चाहते थे और ना ही असुर। कियुँकि यह हलाहल विष इतना खतरनाक था की पूरी ब्रह्माण्ड श्रष्टि का विनाश कर सकता था। सभी देवताओं की विनती करने पर भगवान शिव ने इस विष को ग्रहण किया था। विष उनके शरीर तक न चला जाये तभी माता पार्वती ने उनका गाला दबाकर विष उनकी कंठ में रोक दिया था। जिसके के प्रभाव से उनका कंठ यानि गाला नीला पड गया था। अपने गले में धारण विष की जलन को शांत करने के लिए भगवान शिव ने इस स्थान पर कई सालो तक तप किया। इसीलिए महादेव के इस मंदिर को नीलकंठ महादेव के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की इस मंदिर के शिवलिंग में जल चढाने से भगवान शिव अपने भक्तो से जल्दी प्रसन्न होते है।

समुद्र मंथन की पूरी कहानी को विस्तार से जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करेHistory of Samudra Manthan


माता पार्वती मंदिर नीलकंठ महादेव Mata Parvati Temple Neelkanth Mahadev

नीलकंठ महादेव मंदिर से 2 km दूर सामने वाली पहाड़ी पर भगवान शिव की पत्नी, माता पार्वती जी का मंदिर है। जहा पर आप अपनी गाडी या टैक्सी में 20 रूपये प्रति सवारी किराया देकर आराम से आ सकते है। ऐसी मान्यता है की भगवान शिव की विष की जलन को शांत करने के लिए माता ने इस स्थान पर कई सालो तप किया। और बाद में सदा के लिए एक पिंडी के रूप में विराजमान हो गयी। मंदिर के मुख्य गर्भ ग्रह में माता की तीन मुर्तिया स्थापित है। अधिकतर श्रद्धालु नीलकंठ महादेव के दर्शन करने के बाद इस मंदिर में भी जरूर जाते है।

माता पार्वती के मंदिर से 2 km दूर स्थित बाबा गोरखनाथ की एक प्राचीन झिलमिल गुफा है। जिसका रहस्य बिलकुल अधबुध है। और वहा से आधा किलोमीटर दूर ही गणेश गुफा है। जहा पर सिर्फ पैदल ही जाया जा सकता है।


नीलकंठ महादेव मंदिर में कैसे पहुंचे – How to reach Neelkanth Mahadev Temple in hindi

नीलकंठ महादेव मंदिर पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले ऋषिकेश आना होगा जो रेल या सड़क मार्ग दोनों से जुड़ा है। ऋषिकेश से नीलकंठ जाने के लिए बहुत सारी टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है जिसमे 120 प्रति व्यक्ति का किराया रहता है। नीलकंठ जाने का पहाड़ी रास्ता काफी जोखिम भरा है। जहा पहंचने में लगभग एक घंटे का समय लगता है। अगर आपको पहाड़ो पर ड्राइव करनी अति है। तो आप अपनी गाडी से भी आराम से जा सकते है।

मंदिर जाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें – Some important things to visit the temple in hindi

नीलकंठ जाने वाला पहाड़ी रास्ता काफी छोटा और तरफ गहरी खायी होने के कारन खतरनाक है इसीलिए आप अगर सही से ड्राइव कर सकते है तो ही अपनी गाडी से जाये वरना ऋषिकेश से टैक्सी करले।

इस यात्रा में अगर आप के साथ छोटे बच्चे है तो खाने पीने का सामान अपने साथ जरूर लेले। क्योंकि रस्ते में आपको जयदा दुकाने नहीं मिलेगी। हालाँकि नीलकंठ मंदिर जाते हुए कुछ गांव के बीच खाने पीने की दुकानें है लेकिन वहा ज्यादा उप्लभ्दता नहीं है।

सावन के महीने में श्रद्धालुओं की बहुत भीड़ रहती है। उस समय बाइक से आना सबसे भेड़िया रहता है।

दोस्तों हम उम्मीद करते है कि आपको “नीलकंठ महादेव के इतिहास” के बारे में पढ़कर आनंद आया होगा।

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नीलकंठ महादेव मंदिर की और अधिक जानकारी के लिए निचे दी गयी विडियो को देख सकते है।

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