श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर का इतिहास – History of Shri Baidyanath Jyotirlinga Temple in hindi

श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर भारत में झारखंड राज्य के देवघर स्थान पर स्थित है | कहते है की देवताओं के घर (देवघर) में बसा यह मंदिर, सिद्धपीठ होने की वजह से यहां पर सभी भक्तो की मुरादे जल्दी ही पूरी हो जाती है | इसीलिए इस ज्योतिर्लिंग को “कामना लिंग” भी कहते हैं | हिन्दुओं का यह प्राचीन एवं प्रमुख मंदिर भगवान शिव को समर्पित है | जिसमे शिव की पूजा आराधना श्री वैद्यनाथ के रूप में की जाती है | जिसे वैद्यनाथ धाम भी कहा जाता है |

“वैद्यनाथ ” का अर्थ होता है “दवा के राजा ” यानि किसी प्राणी का उपचार, कहते है की एक बार राक्षस राजा रावण ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करते हुए अपने 9 सिर काट कर भगवान शिव के चरणों में रख दिए और जैसे ही रावण अपना 10 वा सिर काट रहा था तभी भगवान शिव प्रकट हुए और 10 सिर ज्यों-के-त्यों कर दिये | आगे पौराणिक कथा में यह कहानी विस्तार से बताई गयी है | भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगो में स्थापित श्रीविश्वनाथ का यह आठवा ज्योतिर्लिंग माना गया है | इन मंदिरो को ज्योतिर्लिंग इसलिए कहा जाता है कियुँकि भगवान शिव इन स्थानो पर स्वयं प्रकट हुए थे | इसीलिए यह स्थान ज्योतिर्लिंग कहलाते है |

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर की पौराणिक कथा – Legend of Baidyanath Jyotirlinga Temple in hindi

हिन्दू धर्म की शिवपुराण में वैद्यनाथ मंदिर का उल्लेख किया गया है उसके मुताबिक एक बार राक्षस राजा रावण हिमालय के पर्वत पर जाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या करने लगा | कई सालो तक तप करने पर भी भगवान शिव उससे प्रसन्न नहीं हुए | तब जाकर राजा रावण अपने 10 सिरों में से एक-एक सीर काट कर महादेव के चरणों में रखता गया | ऐसा कर रावण ने अपने 9 सीर काट दिए और जैसे ही वह अपना 10वा सीर काटने लगा | तभी भगवान शिव उसकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हो गये |

और रावण के कटे हुए 9 सीर जोड़कर पुरे 10 सिर कर दिये | और रावण से बोले मांगो तुम्हे वरदान में क्या मांगना है | तभी रावण ने कहा महादेव में आपको शिवलिंग के रूप में, लंका में जाकर स्थापित करना चाहता हु | भगवान शिव ने अपने वरदान के अनुसार रावण को शिवलिंग लेजाने की अनुमति तो देदी परन्तु उसके सामने एक चेतवानी राखी | और रावण से बोले की लंका लेजाते हुए ये शिवलिंग तुमने कही भी पृथ्वी पर रखा तो यह शिवलिंग वही स्थापित हो जायेगा | और रावण शिवलिंग को लेकर अपने मार्ग की और नीकल पड़ा | रास्ते में एक चिताभूमि आने पर उसे लघुशंका करने की आवश्यकता पड़ी | तभी रावण ने उस शिवलिंग को एक बैजनाथ भील नाम के प्राणी के हाथो में सोप दिया | और लघुशंका करने की और नीकल पड़े |

इधर बैजनाथ भील को शिवलिंग बहुत भारी लगा और उसने उसे पृथ्वी पर रख दिया |  जब रावण लघुशंका से वापस आकर उस शिवलिंग को पृथ्वी पर रखे देखा तो शिवलिंग को उठाने के लिए उसने अपनी पूरी शक्ति लगायी | लेकिन वहा से शिवलिंग नहीं हिला | शिवलिंग पर अपना अँगूठा गड़ाकर निराश रावण अपनी लंका की और चला गया | बाद में ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवी देवताओं ने आकर उस शिवलिंग की पूजा आराधना की | भगवान शिव के दर्शन होते ही सभी देवी देवताओं ने शिवलिंग को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया और वापस अपने स्वर्ग को चले गये |

वैद्यनाथ मन्दिर का आकर्सन एवं महत्व – Attraction and importance of Baidyanath temple in hindi

देवघर को देवी देवताओं का घर कहा जाता है | यहां हर साल सावन के माह में बहुत बड़ा मेला लगता है | जिसमे लाखो श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और “बोल-बम” का जयकारा लगाते हुए श्रद्धालु वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करते है। और कावड़िया सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर करीब 100 km पैदल यात्रा करके महादेव को जल अर्पित करते है | वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मन्दिर के पास में ही एक विशाल तालाब स्थित है जिसके आसपास बहुत सारे मन्दिर बने हुए हैं यहां पर शिव मंदिर माँ पार्वती जी के मन्दिर से जुड़ा हुआ है |

पुराणों के अनुसार ऐसा कहते है की वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मन्दिर के बाद वासुकिनाथ शिव मन्दिर दर्शन किये जाते है जो की देवघर से 42 km दूर एक छोटे से गांव में स्थित है तभी वैद्यनाथ धाम की यात्रा सम्पूर्ण मानी जाती है | देवघर के मुख्य बाजार में तीन बैजू मन्दिर स्थापित है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि के शुभ पवण अवसर से 2 दिन पहले माता पार्वती और लक्ष्मी-नारायण के मंदिरों से पंचशूल उतारे जाते हैं | जिसको स्पर्श करने के लिए लाखो भक्तों की भीड़ लगती है |

वैद्यनाथ मंदिर में कैसे पहुंचे- How to reach Baidyanath temple

वैद्यनाथ मंदिर पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले झारखण्ड से देवघर आना होगा जो सड़क या रेल मार्ग दोनों से जुड़ा है | रेल मार्ग की बात करे तो जसीडीह रेलवे स्टेशन से 5 km दूर वैद्यनाथ मंदिर है |

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