भारत में वैसे तो हिन्दू तीर्थ स्थलों की कोई भी कमी नहीं है, हर साल लाखो करोडो श्रद्धालु अपनी तीर्थ यात्रा को पूरी करते है। उन्ही में से एक यात्रा जम्मू कटरा से लगभग 14 km की दुरी पर स्थित त्रिकुट पर्वत में बसी माता वैष्णो देवी की बेहद खास माने जाने वाली यात्रा है। यह यात्रा भले ही कठिन हो लेकिन यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की कभी कमी नहीं होती। हर साल लाखो करोडो श्रद्धालु माता वैष्णो देवी की यात्रा करते है। अगर इस साल आप भी माता वैष्णो देवी के दरबार जाने की सोच रहे है, तो उससे पहले ये 10 महत्वपूर्ण बाते जरूर जानले।

1. कोरोना टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट साथ में लेकर जरूर जाये

दोस्तों अगर आप माता वैष्णो देवी के दरबार जाने की सोच रहे है, तो सबसे पहले अपने साथ कोरोना टेस्ट की Negative Report जरूर साथ में लाये, जो की 72 घंटो से पहली नहीं होनी चाहिए, कियोंकि 72 घंटो से ज्यादा वाली रिपोर्ट मान्य नहीं होगी। अगर आपने कोरोना की एक Vaccine लगवाई है तो भी आपको कोरोना की Negative Report दिखानी होगी, वही जो यात्री 15 दिन पहले अपनी दोनों Vaccine लगवा चुके है। तो उनको किसी भी प्रकार की कोई कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट नहीं चाहिए बस उन्हें अपना दोनों Vaccine का Certificate दिखाना होगा। जिन यात्रियों के पास कोरोना टेस्ट की Negative Report नहीं है तो उनके लिए Corona Test की सुविदा उपलब्ध है जो की बिलकुल फ्री है। जो भी यात्री जम्मू ऐरपोट, कटरा रेलवे स्टेशन, या फिर कटरा बस स्टैंड आ रहे है तो वही पर आपको अपनी कोरोना की रिपोर्ट दिखानी होगी। रिपोर्ट नहीं होगी तो वही पर आपका टेस्ट होगा जिसकी रिपोर्ट लगभग 1 घंटे में मिल जाएगी। तभी आपको माता वैष्णो देवी के दरबार में जाने की अनुमति मिलेगी।

2. माता वैष्णो देवी की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय

दोस्तों वैसे तो माता वैष्णो देवी का दरबार भक्तो के लिए हमेशा ही खुला रहता है। वही अगर आप माता के दरबार जाने का प्रोग्राम बना रहे है, तो सबसे अच्छा समय गर्मियों का होता है। कियोकि गर्मियों क समय पहाड़ो पर मौसम काफी अच्छा होता है। यदि आप मानसून या सर्दियों के समय यात्रा करने की सोच रहे तो आपको मौसम का ध्यान जरूर रखना होगा। कियोकि मानसून के समय यहां पर काफी बारिश होती रहती है। और सर्दियों के समय यहां पर काफी बर्फ गिरी रहती है जिस वजह स यहां पर काफी ठंढ रहती है। अगर आप माता वैष्णो देवी के दर्शन प्राचीन गुफा से निकल कर करना चाहते है, तो January से February का महीना सबसे अच्छा होता है। क्योकि उस दौरान यात्री की भीड़ काफी काम हो जाती है जिस वजह से प्राचीन गुफा का रास्ता खोल दिया जाता है।

3. यात्रा पर्ची पंजीकरण का रखे ध्यान

माता वैष्णो देवी की यात्रा शुरू करने से पहले आपको सबसे पहले अपना पंजीकरण कराना होगा। जो की कटरा से ही होगा और बिलकुल फ्री में होता है। जैसे ही आप अपना पंजीकरण कराते है, तो आपको एक यात्रा पर्ची मिलेगी जिसमे यात्रियों के नाम लिखे होते है। उस पर्ची को दिखाने के बाद ही आप माता वैष्णो देवी के दर्शन कर सकते है। तो अगर आप पहली बार माता के दरबार आ रहे है तो अपनी यात्रा पर्ची साथ में जरूर रखे। आपके साथ परिवार के जितने भी सदस्य है, उन सब के नाम एक ही यात्रा पर्ची में लिख दिए जाते है बाद में इस यात्रा पर्ची को दिखा कर ही आप माता वैष्णो देवी के दर्शन कर सकते है।

4. यात्रा में समय के अनुसार रखे ऐसे कपडे और सामान

इस यात्रा के दौरान सबसे पहले आपको ये जरुरी ध्यान रखना होगा की अगर आप सर्दियों के समय यात्रा करना चाहते है तो ठण्ड से बचने के लिए गर्म कपडे जरूर साथ में रखे जैसे शॉल, टोपा, दस्ताने, गर्म शॉक्स, और आराम दयाक जूते। ताकि यात्रा के दौरान आपको किसी भी तरह की कोई दिकत न हो, बाकि आपको इस पूरी यात्रा के रास्ते में सभी सुविधाएं मिल जाएगी जैसे जगह जगह पर वाश रूम, पिने का पानी, और खाने पिने की भी काफी दुकाने मिल जाएगी। अगर आप रात में ठहरना चाहते है तो अर्धकुंवारी मंदिर या वैष्णो माता मंदिर पर ही रुके वहा पर आपको कम्बल की सुविधा मिल जाती है जो की 100 रूपये प्रति कम्बल की सिक्योरिटी के साथ मिलते है जैसे ही आप अगले दिन कम्बल वापिस करते है तो आपको आपकी सिक्योरिटी के पैसे वापस मिल जाते है आप चाहे तो धर्मशाला भी बुक कर सकते है।

5. माता वैष्णो देवी की यात्रा किस ट्रैक से करे

आपके पास वैष्णो देवी की यात्रा करने के काफी सारे विकल्प है जैसे पैदल, घोड़ो से, पालकी से, या फिर हेलीकाप्टर से, ज्यातादर श्रद्धालु इस यात्रा को पैदल ही करना पसंद करते है जो की 14 km की एक लम्बी यात्रा होती है। इस पैदल यात्रा के दौरान आप सबसे पहले बाण गंगा, चरण पादुका और बाद में अर्धकुंवारी माता के दर्शन करते हुए सीधे वैष्णो माता के दरबार तक पहुंचते है। इस बिच सूंदर पहाड़ियों के बिच और जय माता दी के जयकारो के साथ यात्रा करने का आनंद कुछ और ही होता है। लेकिन जो यात्री पैदल नहीं चल सकते है या ज्यादा बुजुर्ग है तो उनके लिए भी काफी सुविधा उपलब्ध है। जैसे कटरा सांजी छत तक हेलीकाप्टर चलते है जिसका एक तरफ का किराया 1800 रुपये है। जो यात्री पैदल नहीं जाना चाहते है लेकिन फिर भी वो बिच में सभी जगह के दर्शन करना चाहते है तो उनके लिए घोड़े या पालकी सबसे अच्छा विकल्प है घोड़े का किराया 2500 रूपये है और पालकी का किराया 3150 रूपये एक तरफ का है।

6. वैष्णो देवी दरबार पहुंचने के बाद स्नान करके पहने नए कपडे

अगर आप कटरा से इस यात्रा को रात में शुरू करते है तो सुबह तक आप माता के दरबार में पहुंच जायेंगे, और अगर आप कटरा से सुबह इस यात्रा को शुरू करते है तो रात तक आप माता के दरबार में पहुंच जायेंगे, माता के दरबार में पहुंचने के बाद आप सबसे पहले स्नान करे और नए कपडे पहने, अधिकतर श्रद्धालु कुरता पजामा पहनते है। आप चाहे तो जीन्स शर्ट लोअर कुछ भी पहन सकते है तभी आप माता के दर्शन करने के लिए जाये।

7. माता वैष्णो देवी के प्रशाद में क्या ले

माता के दरबार में जब आप स्नान करके नए कपडे पेहेन लेते है तो आप वही से प्रशाद ले वैसे तो आपको कटरा में भी काफी दुकानदार प्रशाद के लिए बोलेंगे लेकिन आप माता के भवन से ही प्रशाद ले। माता वैष्णो देवी मंदिर की देख रेख Shrine Borad करता है जिनकी वहा पर प्रशाद की दुकाने भी है आप चाहे तो वही से प्रशाद ले या दूसरी दुकान से बात एक ही है प्रशाद आप 55 रूपये से लेकर 551 तक चढ़ा सकते है। वो आपकी अपनी श्रद्धा है अगर आप माता को चुनरी और छत्र भेट करना चाहते है तो वो आप अलग से ला सकते है।

8. पिंडी के रूप में विराजमान है माता वैष्णो देवी

दोस्तों अगर आप पहली बार माता वैष्णो देवी की यात्रा पर आये है। और दर्शन करने के लिए माता के भवन में जा रहे है तो वहा पर आपके प्रशाद में से नारियल ले लिया जाता है। और उसके बदले आपको एक टोकन मिलता है। ताकि जब आप माता के दर्शन करले तो बाद में उस टोकन की वापस करके प्रशाद के रूप में अपना नारियल वापस लेले, भवन में एक प्राचीन गुफा में माता 3 पिंडी के रूप में विराजमान है। सबसे पहले महा काली, दूसरी महा लक्ष्मी, और तीसरी महा सरस्वती इन्ही 3 पिंडी के रूप में माँ वैष्णो देवी विराजमान है। यात्रियों की बहुत ज्यादा भीड़ होने के कारन देषान करने का बहुत काम समय मिलता है। और वहा पर आप सिर्फ माथा तक सकते है प्रशाद वहा पर नहीं चढ़ता है। अगर आपके पास चांदी का छत्र है तो आप वही पर राखी एक थाली पर चढ़ा सकते है और माता की चुनरी लाये है। तो आपको वहा पर छूकर वो वापस मिल जाएगी जिसे आप अपने मंदिर में रख सकते है।

9. भैरव बाबा मंदिर के भी जरूर करे दर्शन

माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के बाद आपको भैरव बाबा के मंदिर भी जरूर जाना चाहिए जो की माता के भवन से लगभग 3 km की दुरी पर है पौराणिक ग्रंथो में ऐसा वर्णन है की वैष्णो देवी की यात्रा जब तक पूरी नहीं होती तब तक भैरव बाबा पर न जाये इसीलिए वैष्णो देवी पर प्रशाद चढाने के बाद भैरव बाबा पर भी जरूर प्रशाद चढ़ाये अगर आप पैदल जाना चाहते है तो जा सकते है जो की एक बेहद कड़ी चढ़ाई वाली यात्रा है वही अब भैरव बाबा मंदिर जाने के लिए माता वैष्णो देवी के दरबार से रोपवे शुरू हो चूका है जिसका आने जाने का टिकट सिर्फ 100 रूपये एक यात्री का है

10. माता वैष्णो देवी की यात्रा के बाद क्या करे

दोस्तों हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है की जो भी छोटी कन्या होती है वो स्वम एक देवी का रूप होती है। और नवरात्रो के समय जब 9 व्रत पुरे होते है तो नवमी वाले दिन 9 कन्याओं को जिमाया जाता है। कुछ ऐसी ही यात्रा इस मंदिर की भी मानी जाती है। जब आप माता वैष्णो देवी की यात्रा पूरी करके अपने घर वापस आते है। तो आप पूजा पाठ करके 9 कन्याओं की जिमाये, अधिकतर श्रद्धालु दरबार में ही छोटी कन्याओं को पैसे और कुछ खाने पिने की चीज़े देकर उन्हें जिमा देते है। तभी माता वैष्णो देवी की यात्रा सम्पूर्ण मानी जाती है।

 

 

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