Mahabharat Ramayana Story in Hindi:- जब-जब पृथ्वी पर पाप का घड़ा ज्यादा भरने लगा। तब तब धर्म की स्थापना के लिये भगवान ने पृथ्वी पर जन्म लिया। और इसी से रचता चला गया एक नया पुराण, जो युगों-युगों से मनुष्य को मार्गदर्शन देता आया है। इन पुराणों के आधार पर ही हमारी संस्कृति और रीति रिवाज बनते हैं। दोस्तों समय-समय पर हम आपको धार्मिक और पर्यटन स्थलों की जानकारी प्रदान करते रहते है। आज के इस आर्टिकल में आपको महाभारत रामायण (Mahabharat Ramayana Story) की पूरी कहानी को विस्तार से बताने वाले है, जो हिन्दू धर्म के भारतीय महाकाव्यों में से एक है। आपसे निवेदन है की इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े। हैं।

Mahabharat Ramayana History in Hindi
Mahabharat Ramayana Story in Hindi

मान्यताओं के आधार पर हिन्दू संकृति में दो पुराणों महाभारत रामायण (Mahabharat Ramayana Story) का विशेष महत्व हैं :
1. महाभारत
2. रामायण

Mahabharat Story in Hindi (महाभारत की कहानी)

महाभारत रामायण (Mahabharat Ramayana Story) भारतीय महाकाव्यों में से एक है, महाभारत को दुनिया का सबसे लंबा महाकाव्य माना जाता है। जिसे वेदव्यास ने रचा था। और इसमें कौरवों और पांडवों के बीच हुए कुरुक्षेत्र युद्ध का विस्तृत वर्णन है। महाभारत केवल एक युद्ध कथा नहीं है, बल्कि इसमें धर्म, नीति, राजनीति, जीवन के मूल्यों और मानव स्वभाव की जटिलताओं का अद्वितीय दस्तावेज़ भी है। महाभारत की रचना का समय और ऐतिहासिक प्रमाण विवादास्पद हैं, लेकिन इसे लगभग 400 ईसा पूर्व से 400 ईस्वी के बीच माना जाता है। महाभारत को 18 पर्वों (अध्यायों) में विभाजित किया गया है। यहां इसकी संक्षिप्त कथा प्रस्तुत है:

आदि पर्व

महाभारत की शुरुआत राजा शांतनु और गंगा की कथा से होती है। उनके पुत्र भीष्म प्रतिज्ञा करते हैं कि वे जीवन भर ब्रह्मचारी रहेंगे। शांतनु बाद में सत्यवती से विवाह करते हैं, और उनके दो पुत्र होते हैं – चित्रांगद और विचित्रवीर्य। विचित्रवीर्य की दो पत्नियां होती हैं – अम्बिका और अम्बालिका। विचित्रवीर्य की मृत्यु के बाद, वेदव्यास की सहायता से धृतराष्ट्र और पाण्डु का जन्म होता है।

सभापर्व

धृतराष्ट्र का विवाह गांधारी से होता है, और उनके 100 पुत्र (कौरव) और एक पुत्री होती है। पाण्डु का विवाह कुंती और माद्री से होता है, और उनके पांच पुत्र (पांडव) होते हैं – युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव। पाण्डु के निधन के बाद, धृतराष्ट्र कौरवों और पांडवों का पालन-पोषण करते हैं। पांडवों और कौरवों के बीच सत्ता संघर्ष शुरू होता है, जिसमें शकुनि की चालें और द्रौपदी का चीरहरण शामिल है।

वनपर्व

जुए के खेल में युधिष्ठिर सब कुछ हार जाते हैं और पांडवों को 13 वर्षों के लिए वनवास जाना पड़ता है, जिसमें एक वर्ष अज्ञातवास भी शामिल है। वनवास के दौरान, पांडव कई ऋषियों और मुनियों से मिलते हैं और विभिन्न साहसिक कार्यों में संलग्न होते हैं।

विराटपर्व

अज्ञातवास के दौरान, पांडव विराट नगर में राजा विराट के दरबार में विभिन्न वेशों में रहते हैं। अर्जुन बृहन्नला के रूप में राजा विराट की पुत्री उत्तरा को नृत्य सिखाते हैं। अज्ञातवास की समाप्ति के बाद, पांडव अपनी पहचान प्रकट करते हैं और कौरवों से अपने राज्य की मांग करते हैं।

उद्योगपर्व

युद्ध की तैयारियां शुरू होती हैं। पांडव और कौरव दोनों अपनी-अपनी सेनाएं तैयार करते हैं। श्रीकृष्ण पांडवों की ओर से अर्जुन के सारथी बनने का निर्णय लेते हैं। दूतों के माध्यम से शांति वार्ता का प्रयास किया जाता है, लेकिन असफल रहता है।

भीष्मपर्व

महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र के मैदान में आरंभ होता है। पहले दस दिनों तक भीष्म कौरवों के सेनापति रहते हैं। अर्जुन, श्रीकृष्ण के उपदेश (भगवद गीता) से प्रेरित होकर युद्ध में हिस्सा लेते हैं।

द्रोणपर्व

भीष्म के घायल होने के बाद, द्रोणाचार्य कौरवों के सेनापति बनते हैं। द्रोणाचार्य के नेतृत्व में युद्ध और भी भीषण हो जाता है। इस पर्व में अभिमन्यु की वीरगति और जयद्रथ वध जैसी घटनाएं घटित होती हैं।

कर्णपर्व

द्रोणाचार्य के बाद, कर्ण कौरवों के सेनापति बनते हैं। कर्ण और अर्जुन के बीच भयंकर युद्ध होता है। अंत में, अर्जुन कर्ण का वध करते हैं।

शल्यपर्व

कर्ण के बाद, शल्य कौरवों के सेनापति बनते हैं। शल्यपर्व में युद्ध का अंतिम चरण और दुशासन, शकुनि, शल्य आदि का वध होता है।

सौप्तिकपर्व

अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्य पांडवों के शिविर पर रात में आक्रमण करते हैं और द्रौपदी के पाँच पुत्रों (उपपांडवों) की हत्या कर देते हैं। अश्वत्थामा द्वारा उत्तरा के गर्भ पर भी आक्रमण होता है, लेकिन श्रीकृष्ण उसे पुनर्जीवित करते हैं।

स्त्रीपर्व

युद्ध की समाप्ति के बाद, गांधारी और अन्य कौरव परिवार की स्त्रियाँ शोक मनाती हैं। युद्ध के परिणामस्वरूप हुए विध्वंस और परिवार के सदस्यों की मृत्यु का वर्णन होता है।

शांतिपर्व

युधिष्ठिर को राजगद्दी सौंपी जाती है। भीष्म, जो अब शरशैया पर लेटे हैं, युधिष्ठिर को राज्यकाज और धर्म के बारे में उपदेश देते हैं।

अनुशासनपर्व

भीष्म युधिष्ठिर को अनुशासन और राज्य प्रबंधन के सिद्धांतों पर उपदेश देते हैं और फिर अपने शरीर का त्याग करते हैं।

अश्वमेधिकपर्व

युधिष्ठिर अश्वमेध यज्ञ करते हैं, जिसमें अर्जुन द्वारा अश्व की रक्षा की जाती है। यज्ञ के पश्चात, युधिष्ठिर का राज्याभिषेक होता है।

आश्रमवासिकपर्व

धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती, विदुर और संजय वन में तपस्या करने चले जाते हैं। अंत में, वे सभी स्वर्ग सिधार जाते हैं।

मौसलपर्व

श्रीकृष्ण के वंशज यादवों के बीच संघर्ष होता है, जिससे उनके वंश का नाश हो जाता है। श्रीकृष्ण भी अपना शरीर त्याग देते हैं।

महाप्रस्थानिकपर्व

पांडव अपना राज्य परित्याग कर स्वर्गारोहण के लिए हिमालय की ओर प्रस्थान करते हैं। मार्ग में, द्रौपदी और पांडव एक-एक करके शरीर त्याग देते हैं। केवल युधिष्ठिर स्वर्ग तक पहुंचते हैं।

स्वर्गारोहणपर्व

स्वर्ग में, युधिष्ठिर को सभी पांडव, कौरव और श्रीकृष्ण से पुनः मिलन होता है। अंततः, युधिष्ठिर को अपने सभी भाइयों और द्रौपदी के साथ स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है।

महाभारत केवल एक युद्धकथा नहीं है, बल्कि यह धर्म, नीति, राजनीति, जीवन के मूल्यों और मानव स्वभाव की जटिलताओं का अद्वितीय दस्तावेज़ है। इसमें निहित शिक्षाएं और उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

Ramayana Story in Hindi (रामायण की कहानी)

महाभारत रामायण (Mahabharat Ramayana Story) हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय महाकाव्यों में से एक है। रामायण वाल्मीकि द्वारा रचित है और इसमें भगवान राम के जीवन की कथा का वर्णन किया गया है। रामायण को सात कांडों में विभाजित किया गया है: बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड (युद्धकांड) और उत्तरकांड। यहाँ इस महाकाव्य का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है:

Mahabharat Ramayana History in Hindi
Mahabharat Ramayana Story in Hindi

बालकांड

राजा दशरथ अयोध्या के राजा हैं, और उनकी तीन रानियाँ – कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा हैं। वे एक पुत्र के लिए यज्ञ करते हैं, जिससे राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है। ऋषि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को राक्षसों से बचाने के लिए अपने साथ ले जाते हैं। राम, सीता का स्वयंवर जीतते हैं और उनसे विवाह करते हैं।

अयोध्याकांड

राम को राजा बनाने की तैयारी होती है, लेकिन कैकेयी अपनी दो वरदानों का उपयोग करके भरत को राजा बनवाना चाहती है और राम को 14 वर्षों के लिए वनवास भेज देती है। राम अपने पिता के आदेश का पालन करते हुए, सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास पर चले जाते हैं।

अरण्यकांड

राम, सीता और लक्ष्मण जंगल में रहते हैं और कई ऋषियों और मुनियों से मिलते हैं। रावण की बहन शूर्पणखा राम से विवाह का प्रस्ताव रखती है, जिसे वे अस्वीकार कर देते हैं। लक्ष्मण शूर्पणखा की नाक काट देते हैं। इसके बाद, रावण अपने मामा मारीच के साथ मिलकर सीता का हरण करता है और उन्हें लंका ले जाता है।

किष्किंधाकांड

राम और लक्ष्मण सीता की खोज में किष्किंधा पहुंचते हैं, जहां उनकी मित्रता हनुमान और सुग्रीव से होती है। राम, सुग्रीव की सहायता से बालि का वध करते हैं और सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाते हैं। सुग्रीव अपनी सेना को चारों दिशाओं में सीता की खोज में भेजता है।

सुंदरकांड

हनुमान लंका जाते हैं और सीता को अशोक वाटिका में पाते हैं। वे रावण के महल में भी जाते हैं और राम का संदेश सीता को देते हैं। हनुमान अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए लंका में आग लगा देते हैं और वापस राम के पास लौट आते हैं।

लंकाकांड (युद्धकांड)

राम और उनकी सेना लंका पर चढ़ाई करती है। नल-नील की सहायता से समुद्र पर पुल बनाया जाता है। भीषण युद्ध होता है जिसमें रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद और अन्य राक्षसों का वध होता है। अंत में राम, रावण का वध करते हैं और सीता को मुक्त कराते हैं।

उत्तरकांड

राम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटते हैं और राम राज्याभिषेक होता है। लेकिन समाज में सीता की पवित्रता पर सवाल उठाए जाते हैं। राम, सीता को वन में छोड़ देते हैं, जहां वे ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में रहती हैं और लव और कुश को जन्म देती हैं। अंत में, राम को अपने पुत्रों के बारे में पता चलता है और वे सीता को वापस लाने का प्रयास करते हैं। लेकिन सीता पृथ्वी माता से प्रार्थना करती हैं और धरती में समा जाती हैं। राम राज्य का त्याग कर सरयू नदी में जलसमाधि लेते हैं।

रामायण सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि यह धर्म, नैतिकता, कर्तव्य और आदर्शों का प्रतीक है, जो सदियों से भारतीय समाज को प्रेरित करता आ रहा है।

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