पिरान कलियर शरीफ दरगाह (साबिर कलियारी का इतिहास, दरगाह साबीर पाक, दरगाह हजरत इमाम साहब, नमक वाला पीर) Piran Kaliyar Sharif Dargah in Hindi

 उत्तराखंड राज्य के रूड़की शहर से 8 km और हरिद्वार शहर से 24 km की दुरी पर स्थित है. अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी को समर्पित यह दरगाह मुस्लिम समाज के लिए सबसे सम्मानित दरगाह मानी जाती है। जिसमे मुस्लिम और हिन्दू दोनों धर्म के लोग आकर अपनी मन्नत मांगते है। रूड़की के पास एक कलियारी नामक गाँव में स्थित यह दरगाह अपने आप में एक चमत्कारी दरगाह मानी जाती है जहा पर आकर कुछ लोगो को भूत प्रेत जिन्नात से छुटकारा मिलता है।


साबिर कलियारी का इतिहास-Alauddin Sabir Kaliyari History in Hindi

अलाउद्दीन सबिर पाक का जन्म 19 रबी, 592 हिजरी 1196 में मुल्तान जिले के एक नगर में हुआ था जिनके पिता का नाम सय्यद अब्दुल रहीम और माता का नाम जमीला खातून था जो की बाबा फरीद की बड़ी बहन थीं अलाउद्दीन सबिर के पिता की मृत्यु के बाद उनकी माँ जमीला खातून ने उन्हें 1204 में देख रेख के लिए अपने बड़े भाई बाबा फरीद के पास छोड़ दिया और उनसे अपने बेटे अलाउद्दीन सबिर का ध्यान रखने को कहा परन्तु छोटी उम्र में ही बाबा फरीद ने अलाउद्दीन को लंगर का इंचार्ज बना दिया।

कहते है की कुछ समय बाद वो जंगल में रहने लगे और वहा पर उन्हें साबिर नाम मिला इस्लाम धर्म का प्रचार करते करते कुछ समय बाद वो कलियर में आ गए कलियर आने के बाद उन्हें बाबा फरीद द्वारा कलियर सरीफ भी कहा जाने लगा उन्होंने 1253 में कलियर शरीफ के रक्षक के रूप में अपना सारा जीवन इस्लाम धर्म के प्रति समर्पित कर दिया और अपने अंतिम समय तक कलियर सरीफ में ही रहे जिनका नीधम 13 वीं रबी 690 हिजरी 1291 में हुआ था।

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दरगाह साबीर पाक ( Dargah Sabir Paak in hindi)

पिरान कलियर शरीफ दरगाह साबीर पाक की मुख्य दरगाह है. जिसके दो मुख्य द्वार है. और दोनों द्वार के बीचो बिच हजरत साबीर पाक की मजार बनी हुई है. जिसमे उनकी की कब्र है. मुसाफिर सबसे पहले इसी मजार पर आकर फूल चादर चढ़ाकर अपनी मन्नत मांगते है और उनकी मुरादे पूरी भी होती है. साथ ही साथ यहा पर जिन्नात भूत प्रेतों से छुटकारा भी मिल जाता है. इस दरगाह के अंदर ही साबरी मस्जिद और गुल्लर का एक बहुत पुराना पेड़ है जिस पर मुसाफिर अपनी मन्नतो का परचा लिख कर बांदते है दरगाह के पिछे ही जायरीनों के ठहरने के बहुत बड़ा मुसाफ़िर खाना बना हुआ है. इस दरगाह पर हर बृहस्पतिवार को कव्वाली का आयोजन भी होता है. यहाँ पर हर साल बहुत बड़े मेले का आयोजन भी होता है।

दरगाह हजरत इमाम साहब (Dargah Hazrat Imam Sahab in Hindi)

यह दरगाह नहर के दूसरी तरह स्तिथ एक बहुत बड़े चबूतरे पर बनी हुई है. हजरत इमाम साहब साबिर पाक के मामू लगते थे इस दरगाह पर जाने से पहले ही एक बहुत बड़ा द्वार भी बनाया गया है.इस दरगाह के अंदर भी एक बहुत पुराना पेड़ है जहा पर मुसाफिर अपनी शिकायतों का धागा बांधते है. ऐसा कहा जाता है की कलियर शरीफ की जियारत पर सबसे पहले यही आया जाता है।

नमक वाला पीर (Namak wala peer in Hindi)

यह दरगाह दोनों नहरों के बीचो-बीच में स्थित है. यहा पर मुसाफिर प्रसाद के रूप में नमक और झाड़ू चढ़ाते है. कहते है की ऐसा करने से एलर्जी और चमड़ी का रोग बिलकुल ठीक हो जाता है।

पीरान कलियर शरीफ कैसे पहुचे (How to reach Piran Kaliyar Sharif Dargah in Hindi)

पिरान कलियर शरीफ दरगाह के सबसे नजदीक रूडकी और हरिद्वार का रेलवेस्टेशन और बस अड्डा है. और जौलीग्रांट हवाई अड्डा है।

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