Uttarakhand Char Dham Yatra 2021: महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर चार धाम के कपाट खुलने की तिथि का एलान हो गया था जिसमे यमुनोत्री धाम के कपाट 14 may 2021 को गंगोत्री धाम के कपाट 15 may 2021 को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर बिना श्रद्धालुओं की मौजूदगी में खोल दिए गए। 17 मई 2021 सोमवार के दिन केदारनाथ धाम और 18 मई 2021 मंगलवार के दिन बद्रीनाथ धाम के भी कपाट भी खोल दिए गए. इस साल भगवान श्री केदारनाथ के स्वयंभू लिंग पर 900 ग्राम से बने नए स्वर्ण मुकुट को भी चढ़ाया गया. जिसको बंगलुरु से बनवाया गया, केदारनाथ धाम में सबसे पहली पूजा देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नाम से ही हुई.सायं काल की आरती के समय सिर्फ मंदिर के मुख्य पुजारी और प्रशानिक अधिकारी, कर्मचारी ही शामिल थे, इस लेख के माध्यम से हम आपको Uttarakhand Char Dham Yatra 2021 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने वाले है।

चार धाम का इतिहास (Char Dham Yatra History in Hindi)

यमुनोत्री धाम (Yamunotri Dham in Hindi)

यमनोत्री धाम का यह मंदिर उत्तराखण्ड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित हिमालय की पर्वत श्रंख्लायो में बसा है ऋषिकेश से लगभग 220 km दूर और समुद्र तल से 3235 मीटर की ऊंचाई पर यमुना नदी के तट किनारे कालिंद पर्वत पर स्थित है ऊतराखंड के चार धामों में सबसे पहले यात्रा यही से शुरू होती है।

1919 में टिहरी गढ़वाल के राजा प्रतापशाह ने इस मंदिर को ने बनवाया था जो बाद में एक भयानक भुकम्प से पूरी तरह से विध्वंस हो गया था जिसको दोबारा जयपुर की महारानी गुलेरिया ने बनवाया था।

संगमरमर के काले पत्थर से बनी माँ यमुना की मूर्ति मंदिर के मुख्य गृह में विराजमान है. पितरो के पिंड दान का विशेष महत्व रखने वाला यह मंदिर काफी प्रचलित है अधिकतर श्रद्धालु यहां पर आकर अपने पितरो की आत्मा की शांति के लिए पुरे विधिविधान के साथ उनका का पिंड दान करते है।

गंगोत्री धाम (Gangotri Dham in Hindi)

गंगोत्री धाम का यह मंदिर  उत्तराखण्ड राज्य के उत्तरकाशी जिले से लगभग 100 km दूर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है. गंगा नदी का यह उद्रम स्थान 3,100 मीटर (10,200 फीट) की ऊंचाई पर ग्रेटर हिमालय रेंज पर स्थित है. जो की भारत के सबसे प्रमुख मंदिरो में से एक है.

इस मन्दिर में सूर्यकुण्ड, विष्णुकुण्ड और ब्रह्मकुण्ड ये तीन पवित्र स्थल हैं. मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी के शुरूआत में गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा किया गया था और बाद में मंदिर का पुनः निर्माण जयपुर के राजघराने द्वारा किया गया था।

केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham in Hindi)

हिमालय पर्वत की गोद में बसा केदारनाथ धाम का यह मंदिर उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है जो की भारत के 12 के ज्योतिर्लिंगो में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में सम्मिलित है भगवान् शिव को समर्पित इस मंदिर की गणना भारत के विशाल मंदिरो में की जाती है.

कटवां पत्थरों से बनी इन भूरे रंग की विशाल शिलाखंडों से जोड़कर एक 6 फुट के ऊंचे चबूतरे पर बना यह मंदिर जिसका  गर्भगृह काफी प्राचीन है. तीन तरफ पहाड़ों से घिरा केदारनाथ धाम का यह भव्य मंदिर जिसमे एक तरफ केदारनाथ पहाड़, जो की करीब 22 हजार फुट ऊंचा है दूसरी तरफ खर्चकुंड पहाड़, जो की 21 हजार 600 फुट ऊंचा है।

तीसरी तरफ भरतकुंड पहाड़ है जो की लगभग 22 हजार 700 फुट ऊंचा है। केदारनाथ मंदिर में सिर्फ तीन पहाड़ो का ही नहीं बल्कि यहां पर मंदाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी इन पांच नदियों का संगम भी है जिसमे तीन नदियों का अब कोई अस्तित्व नहीं रहा लेकिन अलकनंदा की सहायक मंदाकिनी आज भी मौजूद है।

बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham in Hindi)

बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के बाएं तट पर नर और नारायण दो पर्वतो के बीच स्थित है. भगवान् विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ धाम का यह मंदिर पंच-बदरी में से एक बद्री हैं. उत्तराखंड में स्थित पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग, हिन्दू धर्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

प्राचीन शैली में बने इस मंदिर की ऊँचाई 15 मीटर की है| पौराणिक कथाओं में ऐसा वर्णन किया हुआ है की एक काले रंग के शालिग्राम पत्थर के ऊपर बद्रीनारायण की छवि को भगवान शंकर ने अलकनंदा नदी में खोजी थी, जो की मूल रूप से गर्म पानी “तप्त कुंड” के पास एक गुफा में बना हुआ था।

चार धाम के लाइव दर्शन कैसे करे (Char Dham Live Darshan in Hindi)

देश-दुनिया में कोरोना महामारी के चलते उत्तराखंड सरकार ने श्रद्धालुयो के लिए एक बड़ा फैसला यह भी लिया है। की जो श्रद्धालु चार धाम की यात्रा करना चाहते थे वह अब केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के ऑनलाइन दर्शन कर सकेंगे। जिसके लिए उत्तराखंड देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन दर्शन की सुविधा के लिए हां कर दी है। लेकिन इसमें ऑनलाइन पूजा नहीं दिखाई जाएगी। क्योंकि मंदिर के अंदर मुख्य गर्भगृह की वीडियो प्रसारित की अनुमति नहीं है। 

अगर आप घर बैठकर ही चार धाम यात्रा के ऑनलाइन दर्शन करना कहते है। तो आप उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की वेबसाइट या फिर ऑनलाइन दर्शन देवस्थानम बोर्ड की वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। 

चार धाम खुलने और बंद होने की तिथि (Opening & Closing Date Char Dham Yatra in Hindi)

  • Yamunotri Dham Open Date :- 14-May-2021 (Akshaya Tritiya)
  • Yamunotri Dham Close Date:- 06-Nov-2021 (Bhai Dooj)
  • Gangotri Dham Open Date:- 15-May-2021 (Akshaya Tritiya)
  • Gangotri Dham Close Date:- 05-Nov-21 (Next of Dewali)
  • Kedarnath Dham Open Date:- 17-May-21
  • Kedarnath Dham Close Date:- 06-Nov-21
  • Badrinath Dham Open Date:- 18-May-21
  • Badrinath DHam Close Date:- 10-Nov-21

चार धाम यात्रा के लिए सर्वश्रेष्ठ मौसम (Best Season for Char Dham Yatra in Hindi)

अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर का महीना चार धाम की यात्रा पर जाने के लिए सबसे अच्छा होता है. कियोंकि मौसम काफी ठीक रहता है मानसून के समय यहां पर काफी बारिश और भू-स्खलन का खतरा काफी ज्यादा रहता है इसलिए इस दौरान यात्रा करना काफी कठिन हो सकता है।

चार धाम यात्रा में कैसे पहुंचे (How to reach Char Dham Yatra in Hindi)

हवाई मार्ग (By Air) – जॉली ग्रांट हवाई अड्डा देहरादून
ट्रेन मार्ग (By Train) – हरिद्वार और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है वहा से आप चार धाम के लिए सीधे शेयरिंग टैक्सी, परसनल टैक्सी, या बस ले सकते है.
सड़क मार्ग (By Road) – चार धाम जाने के लिए आप हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून से आराम से जा सकते हैं जहा पर टैक्सी और बस की सारी सुविधाएं उपलब्ध है।

यमुनोत्री धाम कैसे पहुंचे (How to reach Yamunotri Dham in Hindi)

यमुनोत्री का मार्ग हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, टिहरी, बरकोट, हनुमान चट्टी और जानकी चट्टी से अच्छी तरह से जुड़ा है. बस आपको हनुमान चट्टी पर लेजाकर छोड़ देगी वहा से आप जीप द्वारा 5 km जानकी चट्टी जाना होगा जानकी चट्टी से यमनोत्री धाम के लिए 6 km का पैदल मार्ग है।
हनुमानचट्टी से 13 km और जानकी चट्टी से 6 km दूर यमनोत्री मंदिर है। जानकीचट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक 6 km का ट्रेक है जिसके लिए आप पैदल, पोनी, घोड़े, या पालकी और छोटे बच्चों के लिए टोकरियाँ भी उपलब्ध रहते हैं।

गंगोत्री धाम कैसे पहुंचे (How to reach Gangotri Dham in Hindi)

गंगोत्री धाम देहरादून से लगभग 300 km, ऋषिकेश से 250 km और उत्तरकाशी से 105 km दूर है। यह मार्ग हरिद्वार, ऋषिकेश, टिहरी, उत्तरकाशी, भटवारी, गंगनानी, गंगोत्री से अच्छी तरह जुड़ा है। बस या टैक्सी आपको सीधे मंदिर तक छोड़ देगी वहा पर आपको पैदल नहीं चलना पड़ेगा।

केदारनाथ धाम धाम कैसे पहुंचे (How to reach Kedarnath Dham in Hindi)

केदारनाथ धाम हरिद्वार से 239 km, ऋषिकेश से 216 km, और कोटद्वार से 327 km दूर है केदारनाथ धाम हरिद्वार, ऋषिकेश, से आप सोनप्रयाग, गौरीकुंड तक टैक्सी, बस या अपनी कार से आ सकते है गौरीकुंड से केदारनाथ तक आपको 16 km की दुरी पैदल पालकी या खच्चर पे बैठकर तय करनी होगी।

बद्रीनाथ धाम कैसे पहुंचे (How to reach Badrinath Dham in Hindi)

बद्रीनाथ धाम हरिद्वार से 324 km, ऋषिकेश से 297 km, और कोटद्वार से 327 km दूर है। बद्रीनाथ धाम हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, कोटद्वार, जोशीमठ क्षेत्र के सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहाँ पर सभी तरह की टैक्सी और बस सेवाएं उपलब्ध रहती है | बस या टैक्सी आपको सीधे मंदिर तक छोड़ देगी वहा पर आपको पैदल नहीं चलना पड़ेगा ।

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हम उम्मीद करते है की आपको Uttarakhand Char Dham Yatra 2021 के बारे पढ़कर अच्छा लगा होगा।

अगर आप Uttarakhand Char Dham Yatra 2021 के बारे में पूरी जानकारी चाहते है तो नीचे दिए गए Link पर Click करे।

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